मानवाधिकार हमेशा मुसलमानो के पक्ष मे ही क्यूँ जागता है ? क्यूँ न्यायपालिका हमेशा मोदी के पीछे पड़ी रहती है ?
देश मे न्यायालयों मे लाखो मुकदमे लटके है, दंडाधिकारी कि अदालत से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक काम कि गति इतनी मंथर है कि हिंदुस्तान मे एक कथा प्रचलित हो गई है कि अस्पताल और अदालत का मुंह दुश्मन को भी नहीं देखना पड़े तारीख पर तारीख देना ही अदालतों कि अदा बन चुकी है लेकिन राजनीतिक मुकदमो मे न्यायालय अच्छा खासा निंदा रस का पान करवाया करते है । अकेले गुजरात के मुख्यमंत्री का मामला देख लें । उन पर न्याय के नाम जिस तरह के लात मुक्के चलाए जा रहे है उसे भले ही नरेंद्र मोदी स्वयं न्यायालय के
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