एनडीटीवी पर एक कार्यक्रम आता है जायका इंडिया का ! ( उर्दू और अँग्रेजी शब्दो का मेलजोल हिन्दी समाचार चेनल पर, जायका इंडिया का ) इस कार्यक्रम मे प्रस्तुत-कर्ता कहता है की “एक इकलौते हम ही है जो देश के लिए खाते है” ।
यह तो हुई खाने की बात ! हमारे देश मे खाने का मतलब आजकल घुस लेना ज्यादा हो गया है नेता तो खा ही रहे है लेकिन जो स्टिंग ओपरेशन करते है, जो सच खबरे दिखाने वाले है वो भी खा रहे है ! एनडीटीवी आजतक जैसे चेनल अपनी बेबाकी, निष्पक्ष समाचार, खबरों की स्वतन्त्रता के लिए कागजी मशहूर है लेकिन भ्रष्टाचार पत्रकारिता को क्यूँ छोड़ेगा, हमारा मीडिया जनता के सामने सच्चाई लाने का दावा करता है लेकिन वह अब इसे अहसान मानने लगा है जनता पर, उसे स्वयं के दामन भी साफ कर लेने चाहिए जो दागदार होते जा रहे है !
मीडिया मे कई पत्रकार (के नाम पर धब्बा है) है जिनके संपर्क देश विदेश के बड़े बड़े लोगो तक है कोई तो ऐसे पत्रकार है जिनहे बड़ी ही कम उम्र मे पद्मश्री मिल चुका है, पुरस्कार क्या है यह राष्ट्रिय पुरस्कार नहीं होते है यह तो स्वामिभक्ति पुरस्कार होते है जो कोई पार्टी विशेष देती है अपने स्वामीभक्तों को, आजकल मीडिया का दबदबा ज्यादा है सरकार पर, आपको पता नहीं होगा शायद की देश मे मंत्री चुनना अब पीएम के बस की बात नहीं है कुछ पत्रकार ऐसे है जो पैसे के लिए मंत्री मण्डल मे तक फेरफार कर देते है इतनी पहुँच होती है इनकी ।
एनडीटीवी मे एक पत्रकार (?) है बरखा दत जो कॉर्पोरेट समूह के बीच काफी प्रसिद्ध है ! प्रधानमंत्री से लेकर प्रतिपक्ष के नेता तक और देश-विदेश के बडे-बड़े लोगों तक बरखा दत्त जैसे लोगो की पहुंच बहुत ऊची है । भारत के बड़े बड़े औद्योगिक घरानो के बीच के मसलो मे भी दिलचस्पी लेती है और मंत्री मण्डल मे भी , और यह भी तय करती है कि कौनसा व्यक्ति किस मंत्रिमंडल के लिए फिट है जैसे कोई प्रधानमंत्री या पार्टी की नेता हो !
और एक महान पत्रकार है प्रभु चावला बड़े बड़े लोगो से सीधी बाते ही करते है उन्हे टेढ़े काम करना पसंद नहीं है सीधा काम मतलब सच का साथ तो इनकी दोस्ती दलालो से क्यूँ, जज के बारें ये लोग सोचते है की फलाना जज केरला का है फलाना तमिलनाडू का ! वो बिकेगा वो नहीं बिकेगा …… ?
अब जनता ऐसे लोगो से कैसे अच्छी पत्रकारिता की आशा कर सकती है जिनके खुद के पैर कीचड़ मे हो ! रेपोर्टिंग करते है तो ऐसा लगता है जैसे कोई बहुत बड़े महात्मा है जैसे भगवान ने विशेष रूप से असहाय लोगो की सेवा मे भेजा हो !

लेकिन हद तो तब हो जाती है तब ये चेनल वाले उनके दागी पत्रकारो के बारें मे रिपोर्ट नहीं देते अपने चेनल पर, अरुंधति रॉय वाला घटनाक्रम एनडीटीवी पर क्यूँ नहीं दिखाया गया ? प्रभु चावला और नीरा राडिया ( मॉडर्न कॉर्पोरेट दलाल) वाली टेप आजतक के चेनल ( नंबर – १ न्यूज चेनल, स्टिंग-ओपरेशन चेनल, वारदात, सनसनी) पर क्यूँ नहीं बताई । अब निष्पक्ष पत्रकारिता कहा है आप ही बताइये ? ऊपर से जब दूसरे पत्र पत्रिकाए इन दागी पत्रकारो को नंगा करते है तब इनके मुख्य पदाधिकारी उन पत्र पत्रिकाओ के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करते है, यहाँ देखो !, यहाँ भी देखो
अब कहा जाती है इनकी निष्पक्षता खबरों की ! जबकि ये तो लाख दावा करते है की हम निष्पक्ष है वगेरह….वगेरह ।

इन सब कारनामो से तो इनकी ही टेगलाइन सही फिट बेठती है की “एक इकलौते हम ही है जो देश के लिए खाते है (क्यूंकी, शायद इन्हे मेहनताना / भत्ता नहीं मिलता है )

दलाल नीरा राडिया और रतन टाटा के बीच बातचीत सुनिए !

दलाल नीरा राडिया और प्रभु चावला के बीच बातचीत सुनिए !

दलाल नीरा राडिया और बरखा दत के बीच बातचीत – १

दलाल नीरा राडिया और बरखा दत के बीच बातचीत – २


3 टिप्पणियाँ

  1. babloo kota
    Comment Arrow

    मीडिया के मक्कार क्यों कहे इन्हे पत्रकार

  2. rahul
    Comment Arrow

    भाई साहब , आप प्रभु चंवाला पर गलत आरोप लगा रहे हो वो देश और राष्ट्रहित , और हिन्दुत्व की बात करने वाले इकलोते अच्छे और सच्चे पत्रकार है |
    किसी नेता विशेष से सम्बन्ध होना कोई गुनाह नहीं है | यदि आप इसी तरह से अफवाहों का परचार करेंगे तो शायद एक समझदार वर्ग आपसे टूटकर अलग हो जायेगा | सत्य और तथ्य के लिए आपकी वेब पढता हूँ पर आज पहली बार कुछ अच्चा नहीं लगा | बरखा पर इल्जाम सही हो सकता है पर प्रभु एक सही व्यक्ति है|

    • Comment Arrow

      मेरे भाई सभी एक ही थाली के चट्टे बट्टे है ये रिपोर्टर है पैसे मिलते ही इनकी मानसिकता भी बिक जाती है पैसे का खेल है

Comment using..